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नागरिक अधिकार पत्र


भारत के संविधान में 74 वें संशोधन तथा उसकी बारहवीं अनुसूची में अंकित विभिन्न कृत्यों से स्थानीय नगर प्रशासन की संरचना, दायित्वों एवं अधिकारों में व्यापक अभिवृद्धि हुई है और तदनुसार उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम 1916 तथा उ0प्र0 नगरपालिका अधिनियम 1916 भी संशोधित हो गए हैं। प्रदेश की नगरपालिकायें, जिनमें सभी नगर निगम, नगरपालिका परिषदें, और नगर पंचायतें शामिल हैं, नगर प्रशासन को संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह होने के साथ साथ गुणवत्तापरक प्रचुर नगरीय जनसुविधाएँ प्रदान करने हेतु कटिवद्ध हैं। प्रदेश के 13 नगर निगम, 194 नगरपालिका परिषद तथा 423 नगर पंचायत अपने अपने क्षेत्र के नागरिकों को बेहतर और प्रभावी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने में तथा उनसे जुड़ी समस्याओं के निराकरण हेतु सत्त प्रयत्नशील है। नगरपालिकाओं के अधिकारों के साथ साथ कर्तव्यों के निर्वहन एवं उनके क्रियान्वयन पर विशेष बल होने के कारण वे नागरिकों को प्रमुख रूप से शुद्ध पेयजल, सार्वजनिक सफाई, जल निकासी व ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन द्वारा स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण देने, निर्वाध आवागमन हेतु अतिक्रमण मुक्त सड़कें और उन पर उपयुक्त पथ प्रकाश की व्यवस्था करने तथा अन्य जन सुविधाओं उपलब्ध कराने में अधिक समर्थ हो सके हैं।


जलापूर्ति एवं सीवरेज जल निकासी, सड़क अनुरक्षण, सफाई एवं कूड़ा निस्तारण ,जन स्वास्थ्य मार्ग प्रकाश, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण तथा अन्य सेवाओं तथा विभिन्न करों , शुल्कों, प्रयोक्ता प्रभारों के आरोपण एवं उद्ग्रहण करने के सम्बन्ध में उनकी परिवादों और सुझावों का समयबद्ध रूप में त्वरित निस्तारण सुनिश्चित कराने हेतु यह नागरिक अधिकार पत्र (म्‍यूनिसिपल सिटीजन चार्टर) प्रस्तुत किया जा रहा है। इस प्रकार से एक ओर नागरिक अधिकार पत्र (सिटीजन चार्टर) के अनुरूप नगरपालिकाओं के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा विभिन्न सुझावों और परिवादों का निस्तारण निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा और वहीं दूसरी नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि वे समाज में जन चेतना एवं सहभागिता का भाव जागृत कर नगरपालिकाओं को बेहतर रूप में काम करने में सहयोग करें।


नगरपालिका नागरिक अधिकार पत्र (म्‍यूनिसिपल सिटीजन चार्टर) के उदेश्य: